Chernobyl में क्या हुआ था? चेर्नोबिल हादसा क्या है?

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चेर्नोबिल हादसा क्या है Chernobyl Disaster In Hindi
चेर्नोबिल हादसा क्या है Chernobyl Disaster In Hindi

Russia-Ukraine युद्ध के बीच चेर्नोबिल शहर एक बार फिर चर्चा में है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूसी सेना ने चेरनोबिल पर कब्जा कर लिया है। आज तक के हुए सबसे खतरनाक मानव निर्मित आपदा में Chernobyl nuclear power plant, नागासाकी और हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बमों के मुकाबले लगभग 400 गुना ज्यादा रेडिएशन छोड़ने के लिए जिम्मेदार है। ये घटना 26 अप्रैल 1986 को एक परीक्षण के दौरान Chernobyl nuclear power plant के चौथे हिस्से से शुरु हुई थी। 

चेर्नोबिल की दुर्घटना एक सिस्टम के पॉवर फेलियर की वजह से हुई थी। आपातकालीन स्थिति में जब इस पर काबू पाने की कोशिश की गई तो उल्टा विद्युत का उत्पादन और तेजी से बढ़ने लगा था। इससे एक संयंत्र टूट गया। तेज हवा और आग की वजह से रेडिएशन तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गया था।

37 साल पहले 26 अप्रैल 1986 को तत्कालीन सोवियत संघ के चेर्नोबिल के न्यूक्लियर पावर प्लांट में एक भयानक विस्फोट हुआ था। यह धमाका इतना विनाशकारी था कि कुछ ही घंटे में यहां काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई थी जबकि न्यूक्लियर रेडिएशन के कारण सैकड़ों कर्मचारी बुरी तरह जल गए थे। तो दोस्तों चलिए जानते हैं Chernobyl में क्या हुआ था? चेर्नोबिल हादसा क्या है? चेर्नोबिल पावर प्लांट में क्या हुआ था जिसके कारण लाखों लोगों की मौत हो गई थी Chernobyl disaster को detail में जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें। 

चेर्नोबिल कहां स्थित है? 

यूक्रेन की राजधानी Kiev से करीब 80 मील उत्तर में चेर्नोबिल स्थित है। इस न्यूक्लियर प्लांट से कुछ मील की दूरी पर एक छोटे से शहर प्रिपयट (Pripyat) को बसाया गया था। Chernobyl nuclear power plant के निर्माण की शुरुआत 1977 में हुई थी इस दौरान यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा था 1983 तक चार न्यूक्लियर रिएक्टर का काम पूरा हो चुका था।

चेर्नोबिल में क्या हुआ था?

26 अप्रैल को 1:23 बजे प्लांट की बिजली गुल हो गई इसके बाद चेर्नोबिल के अधिकारी ने दिन में इस बात की जांच के लिए एक नियमित अभ्यास किया गया कि क्या बिजली गुल होने से प्लांट के आपातकालीन स्थिति में वॉटर कूलिंग सिस्टम काम करेगा या नहीं लेकिन कुछ सेंकेड के भीतर ही रिएक्टर नंबर चार में अनियंत्रित भाप के रूप में दबाव बनने लगा भाप के दबाव के चलते रिएक्टर की छत उड़ गई जिससे रेडिएशन आसपास के इलाकों क्षेत्रों में फैल गया। 

उसी समय घटना के तुरंत बाद ही दमकलकर्मी प्लांट में पहुंचे और विस्फोट के बाद लगी आग को बुझाने लगे इस दौरान दमकल कर्मियों ने रेडिएशन से बचने वाले उपकरण भी नहीं पहने हुए थे जिसके कारण रेडिएशन के चलते प्लांट में मरने वाले 28 लोगों में कई दमकलकर्मी भी शामिल थे।

 रिएक्टर की छत में लगी ज्यादातर आग पर काबू पा लिया गया लेकिन इन कोशिशों के बावजूद ग्रेफाइट आग पकड़ गई  ग्रेफाइट की आग की वजह से रेडियोएक्टिव तत्व वातावरण में काफी ऊपर तक चले गए इस तरह चेरनोबिल पावर प्लांट में शुरू हुआ एक टरबाइन टेस्ट 56 मिनट के भीतर दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना में बदल गया।  

चेर्नोबिल हादसा क्या है?  Chernobyl Disaster In Hindi?

चेर्नोबिल एक परमाणु हादसा है जो की साल 1986 मेँ Chernobyl nuclear power plant मेँ हुआ था। चेर्नोबिल परमाणु प्लांट यूक्रेन की प्रीप्याट सहर के पास मौजूद हैं जब यह हादसा हुआ था जब यूक्रेन सोवियत संघ (USSR)  का हिस्सा था और उस समय शीतल युद्ध के कारण USSR और USA के अंदर परमाणु हथियारों का प्रतियोगिता चल रहा था।

चेर्नोबिल (Chernobyl disaster in hindi) निकला हादसा अब तक का पृथ्वी का सबसे बड़ा परमाणु हादसा है क्योंकि इस का प्रभाव यूक्रेन से होते हुए पूरे यूरोप और अमरीका की पूर्वी तट तक पहुँच गया था। 

हादसे के दिन क्या हुआ था? 

चेर्नोबिल मेँ लगे हर एक रिएक्टर से मुख्य रूप से बिजली और प्लूटोनियम (plutonium) निकलता था। इसलिए इस के अंदर बहुत तेजी से परमाणुओं का प्रतिक्रीया होता था | परंतु दोस्तों यह रिएक्टर इतना ताकतबर होने के बावजूद इसकी एक कमजोरी थी। यह रिएक्टर कम ऊर्जा मेँ सही तरीके से काम नहीं कर पाता था। इसलिए इस को कम ऊर्जा मेँ चलना खतरे से बिलकुल भी खाली नहीं था।

रिएक्टर के अंदर होने वाले ताकतबर परमाणु प्रतिक्रीया (nuclear reaction) रिएक्टर को बहुत ही कम समय मेँ बहुत ज्यादा गरम कर देते थे। इसलिए रिएक्टर को हमेशा ठंडा रखने के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल किया जाता था। परंतु अप्रैल 26 1986 के दिन किसी कारण से रिएक्टर को ठंडे पानी की पूर्ति नहीं हो पाई और रिएक्टर बहुत ज्यादा गरम हो कर एकाएक विस्फोट हो कर फट गया | पानी के आपूर्ति का मूल कारण बाद में रिएक्टर से ठंडे पानी की रिसाव को बताया गया।

रिएक्टर के अंदर मौजूद पावर फ्युल केवल के साथ रिएक्टर को ठंडा करने वाला पानी प्रतिक्रिया करते हुए एक बड़े से धमाके की कारण बनी।चेर्नोबिल के अंदर बाकी बचे रिएक्टर 2 को साल 1991 के में बंद कर दिया गया था।इसके अलावा रिएक्टर 1 और 3 को क्रमानुसार 1996 और 2000 को बंद करवा दिया गया था।

वर्तमान समय में चेर्नोबिल?

हादसे की 37 साल बाद भी चेर्नोबिल की मिट्टी,पेड़ पौधे तथा इसके आसपास मौजूद हर एक वस्तु रेडिएशन के कारण बहुत ज्यादा खतरनाक हैं।

 रैडिओएक्टिव पदार्थ मिट्टी के साथ मिल जाता हैं तो वह लंबे समय तक वायुमंडल को विकिरण (radiation) के द्वारा प्रदूषित करता रहता हैं। इसलिए चेर्नोबिल के अंदर आज भी रहना खतरे से खाली नहीं हैं।

चेर्नोबिल से जुड़े रोंगेटे खड़ी कर देने वाली बात? Chernobyl Disaster Facts In Hindi

चेर्नोबिल मेँ ज्यादा नुकसान विस्फोट में नहीं Radiation से हुआ था 

कई सारे लोगों की यह सोचते हैं की चेर्नोबिल के धमाके से बहुत ज्यादा लोगों की जान गई थी| लेकिन दोस्तों मैं आपको बता दूँ की सिर्फ धमाके से 56 लोगों की ही जान गई थी | परंतु धमाके के बाद रेडिएशन के कारण हजारों लोगों की जान चली गयी।

चेर्नोबिल हादसे की पहली सूचना सबसे पहले स्वीडन ने दिया था। चेर्नोबिल से 1100 km दूर मौजूद एक स्वीडिस न्यूक्लियर प्लांट मेँ लगे सेंसर के माध्यम से सबसे पहले चेर्नोबिल हादसे का पता लगा और स्वीडिस ने ही बाकी देशों को बताया इस घटना के बारे में क्योंकि कई दिनों तक इस हादसे की बात सोवियत संघ ने अपने लोगों से छुपा कर रखा हुआ था।

क्या आज के समय में हम चरणों में घूमने जा सकते हैं?

तो दोस्तों मैं आपको बता दूं कि आज के समय में भी कई लोग चरणों में घूमने के लिए जाते हैं। जबकि आज के समय में भी Chernobyl nuclear power plant के आसपास के क्षेत्रों में रेडिएशन फैला हुआ है इसके लिए आपको इजाजत व कुछ नियम का पालन करना पड़ेगा क्योंकि रेडिएशन का खतरा है इसलिए अगर आप कभी भविष्य में चेर्नोबिल घूमने जाएँ तो सुरक्षा का ध्यान रखें।

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