महाराणा प्रताप इतिहास का एक अनूठा पहलू-King Of Mewar

महाराणा प्रताप

परिचय

  • परम प्रतापी, शक्तिशाली, पराक्रमी,चट्टान की तरह अटल, राजपूताना की जन्मभूमि को गौरवान्वित करने वाले वीर महानायक महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश में हुआ|
  • महाराणा प्रताप के पिता श्री उदय सिंह राणा सांगा के पुत्र थे|
  • उनकी माता का नाम महारानी जयवंता कंबर था|
  • उनके बचपन का नाम कीका था|

महाराणा प्रताप:एक योद्धा के रूप में-

  • महाराणा प्रताप की ऊंचाई 7 फीट 5 इंच वजन 110 किलो था|
  • कवच का वजन 72 किलोग्राम था|
  • महाराणा प्रताप के भाले का वजन 81 किलोग्राम था|
  • युद्ध के समय अस्त्र-शस्त्र से लिपटे महाराणा प्रताप का वजन 280 किलोग्राम था|
  • महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक था

अकबर और राणा उदय सिंह की भिड़ंत–

  • 1566 में अकबर ने चित्तौड़गढ़ किले पर चढ़ाई की पर वह असफल रहा|
  • 1567 में अकबर ने चित्तौड़गढ़ पर फिर से चढ़ाई की और इस बार वह सफल रहा और उसने किले को चारों ओर से घेराव कर दिया|
  • किले में खाने-पीने की कमी होने लग गई|
  • राज दरबारियों की विनती पर उदय सिंह ने चित्तौड़गढ़ को बेहतर समझा और वहां से निकलकर कुंभलगढ़ चले गए|
  • इस युद्ध में फत्ता और जयमल नामक दो राजपूत योद्धाओं ने अपने जीवन के अंतिम सांस तक के किले की रक्षा की|
  • इस युद्ध के बाद हजारों राजपूत महिलाओं ने जोहर कर दिया
  • अकबर ने गुस्से में आकर 30000 लोगों की हत्या करवा दी

महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक–

  • महाराणा प्रताप ने अपने पिता की अंतिम इच्छा के अनुसार उसके सौतेले भाई जगमाल को राजा बनाने का निर्णय लिया लेकिन मेवाड़ के विश्वासपात्र चुंडावत राजपूतों ने जगमाल के सिंहासन पर बैठने को विनाशकारी मानते हुए उसको गद्दी छोड़ने के लिए मजबूर किया|
  • जगमाल सिंहासन छोड़ने के लिए इच्छुक नहीं था लेकिन उसने बदला लेने के लिए अजमेर जाकर अकबर की सेना में सम्मिलित हो गया और उसको जहाजपुर की जागीर मिल गई|
  • 1567 में राजकुमार प्रताप को 27 वर्ष की उम्र में 54 वे सिसोदिया शासक के रूप में महाराणा का खिताब मिला

अकबर और महाराणा प्रताप के संबंध–

जब राणा प्रताप मेवाड़ के सिंहासन पर अपने पिता के उत्तराधिकारी बने तो अकबर ने राजपूत राजा को अपने वासल बनने के लिए राजनयिक दूतावासों की एक श्रृंखला एक एक अंतिम अनुयाई टोडरमल बिना किसी अनुकूल परिणाम के मेवाड़ को भेजा गया था कूटनीति विफल होने के साथ युद्ध अनिवार्य था|

सैन्य शक्ति की तुलना–

  • राणा की सेनाएं 20000 थी जिसे मानसिंह और आसिफ खान की 80000 मजबूत सेना के खिलाफ लगाया गया था|
  • अकबर तथा महाराणा प्रताप दोनों ही के पास हाथी युद्ध में शामिल थे|
  • अकबर के पास तोपखाने थे पर महाराणा प्रताप के पास किसी प्रकार का तोप नहीं था|

हल्दीघाटी की लड़ाई-

  • 18 जून 1576 को राजपूताना के इतिहास में सबसे भयंकर युद्ध लड़ा गया जिसे हल्दीघाटी का युद्ध के नाम से जाना जाता है|
  • इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व राजा मानसिंह और आशफ खा कर रहे थे तथा मेवाड़ की सेना का नेतृत्व रामसा तंवर तथा उनके पुत्र कर रहे थे|
  • 4 घंटे तक चलने वाली इस ऐतिहासिक लड़ाई में प्रताप की सेना के लगभग 1600 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए जबकि मुगल सेना के 150 सैनिक|
  • युद्ध के मैदान में महाराणा प्रताप बुरी तरह से घायल हो गया लेकिन उसने हार नहीं मानी और उन्होंने हाथी पर बैठे मानसिंह पर भाले से आक्रमण किया गया जो महावत के आर-पार निकल गया परंतु मानसिंह बच गया|
  • उसी समय मुगल सेना ने महाराणा प्रताप को चारों तरफ से घेर लिया और चेतक और महाराणा प्रताप बुरी तरह से घायल हो गए|

चेतक का बलिदान–

  • चेतक एक पैर से बुरी तरह से घायल हो चुका था और वह तीन पैर पर दौड़ कर 26 फीट गहरे दरिया में कूदकर महाराणा प्रताप की जान की रक्षा की और खुद वीरगति को प्राप्त हो गया|
  • हल्दीघाटी में आज भी चेतक का मंदिर बना हुआ है|

युद्ध का परिणाम–

  • इस युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना को अत्यधिक नुकसान हुआ परंतु उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया|
  • आत: यह युद्ध परिणामहीन रहा|
  • मुगल सेना मेवाड़ के कुछ क्षेत्र पर अपना आधिपत्य कायम करने में सफल रहे परंतु संपूर्ण मेवाड़ उनके आधिपत्य में महाराणा प्रताप के जीते जी कभी नहीं आया|
  • उसके पश्चात प्रताप ने चित्तौड़ और मंगल गढ़ को छोड़कर संपूर्ण मेवाड़ को पुण्य जीत लिया और मुगल सेना को भागने के लिए मजबूर कर दिया|

अंतिम समय–

  • महाराणा प्रताप ने मुगलों के सामने कभी भी आत्मसमर्पण नहीं किया
  • महाराणा प्रताप ने कसम खाई कि जब तक वह संपूर्ण मेवाड़ को आजाद नहीं करा लेते तब तक वह राज महल के सुख नहीं भोगेंगे
  • अपनी गोरिल्ला युद्ध नीति से उन्होंने अकबर की सेना को कई बार मात दी
  • अतः शिकार के दौरान लगी चोट की वजह से 19 जनवरी 1597 को महाराणा प्रताप ने चांडव में अपने जीवन की अंतिम सांसे ली

इन्हे भी पढ़े-

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here