जाने कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास और रहस्य क्या है?

1622
जाने कोणार्क सूर्य मंदिर का इतिहास और रहस्य क्या है

भारत में बहुत से ऐतिहासिक मंदिर है जो सदियों से लोगों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है|इन्हीं में से एक मंदिर कोणार्क का सूर्य मंदिर है। कोणार्क के सूर्य मंदिर को सन 1984 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। यह मंदिर उड़ीसा मैं जगन्नाथपुरी से 35 किलोमीटर उत्तर पूर्व की दिशा में कोणार्क शहर में स्थित है, इसलिए इस सूर्य मंदिर को कोणार्क मंदिर भी कहते हैं।तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे में कुछ रहस्य और इतिहास से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताएंगे|

कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण:-

राजा नरसिंह देव ने उड़ीसा के कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण 13वी शताब्दी में करवाया था कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों तथा काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है। इस मंदिर का निर्माण कलिंग शैली में हुआ है। यह मंदिर वर्तमान समय में अपनी विशिष्ट आकार और शिल्प कला के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है|
कोणार्क सूर्य मंदिर के दोनों और 12 पहियों की 2 पंक्तियों में कुल 24 पहिए हैं कुछ लोगों का कहना है कि 24 पहिए दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं और इन सभी 24 पहिए वाले रथ को सात घोड़े खींचते हैं और कुछ लोगों की मान्यता है यह सात घोड़े 7 दिन के प्रतीक हैं परंतु वर्तमान में सातों में से एक ही घोड़ा बचा हुआ है


इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो सिंह हाथियों पर सोते हुए दिखाया गया है। यह सूर्य मंदिर तीन मंडप में बना हुआ है
परंतु वर्तमान समय में इन मंडपों मैं से केवल एक मंडप बचा हुआ है। इस मंदिर में सूर्य भगवान की तीन प्रतिमाएं हैं
अंग्रेजों ने संता से पूर्व ही सूर्य मंदिर के सभी द्वारों को रेत और पत्थर से अस्थाई रूप से बंद करवा दिया था ताकि मंदिर और छतिग्रस्त ना हो।

कोणार्क मंदिर के चुंबकीय पत्थर का रहस्य:-

कई कथाओं के अनुसार माना जाता है कि सूर्य मंदिर के शिखर पर एक चुंबकीय पत्थर लगा है और इसके चुंबकीय प्रभाव से कोणार्क के समुद्र से गुजरने वाले जहाज इसकी और खींचे चले आते हैं। मान्यता है कि मुस्लिम नाभिक इस चुंबकीय पत्थर को निकाल कर ले गए ।
यह चुंबकीय पत्थर एक केंद्रीय शिला का काम करता था जिसे हटाने के कारण मंदिर की सभी दीवारों के संतुलन खो गया और कुछ दीवारें गिर गई।

कोणार्क सूर्य मंदिर से जुड़ी रोचक तथ्य:-

  • समुद्री यात्रा करने वाले लोग इस मंदिर को ब्लैक पैगोडा कहते थे|
  • सूर्य कोणार्क मंदिर के शिखर पर 52 टन का एक चुंबकीय पत्थर लगा हुआ था जिसके प्रभाव से वहां समुद्र से गुजरने वाले बड़े जहाज मंदिर की ओर खिंचे चले आते थे|और इसी वजह से कुछ ना कुछ पत्थर को चुरा कर अपने साथ ले गए।
  • कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर को भगवान श्री कृष्ण के पुत्र सांब ने बनवाया था
  • वर्तमान में यह सूर्य मंदिर यूनेस्को द्वारा सन 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
  • कुणाल सूर्य मंदिर सूर्य भगवान को समर्पित होने के कारण इस मंदिर में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है इस मंदिर का निर्माण एक रात की तरह किया गया है|और कहा जाता है कि इस रथ पर सूर्य भगवान विराजमान थे|
  • कोणार्क मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो शेर हाथियों पर विराजमान है|
  • कोणार्क शब्द में अर्थ का अर्थ होता है सूर्या और कोण का अर्थ कौन है कोने और किनारे से है|
  • इस कोणार्क सूर्या मंदिर को सात घोड़ों से खींचते हुए निर्मित किया गया है|
  • कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान सूर्य देव की तीन प्रतिमाएं बनी हुई है|

कोणार्क सूर्य मंदिर का पौराणिक इतिहास:-

कहा जाता है कि सूर्य भगवान की आराधना करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है|इस मंदिर का एक रहस्य भी है की भगवान श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब को श्राप से कोर्ट रोग हो गया था और इस श्राप से बचने के लिए उसे भगवान सूर्य की पूजा करने की सलाह दी गई थी, साम्ब ने कोणार्क में समुद्र किनारे 12 वर्ष तपस्या की और सूर्य देव को प्रसन्न किया। और सूर्य देवता ने तपस्या से प्रसन्न होकर साम्ब के लोगों का अंत कर दिया।

जिसके बाद सामने सूर्य भगवान का एक मंदिर निर्माण करने का निश्चय किया और चंद्रभागा नदी में स्नान करते हुए उसे सूर्य देवता की एक मूर्ति मिली और उसने मंदिर का निर्माण करवाया।

दोस्तों हमने इस पोस्ट में आपको कोणार्क सूर्य मंदिर के बारे मैं पूरी जानकारी दी है आपको यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट सेक्शन में कमेंट करके बताएं। ऐसे ही जानकारी के लिए हमें सब्सक्राइब करें

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here